April 2, 2025
Why India needs to clean its air?भारत को वायु साफ करने की आवश्यकता क्यों है?
Why in News ? The news was published in an artcle of The Hindu News paper. It highlights the issues & challenges related to air pollution.
Why this topic is Important for UPSC Prelims & Mains?
Prelims (GS Paper I & III)
- Air Pollution as an Environmental Issue – Key facts about PM2.5, PM10, and their health effects.
- Government Schemes & Policies – National Clean Air Programme (NCAP), Bharat VI, Pradhan Mantri Ujjwala Yojana (PMUY), FAME II, Swachh Bharat Mission-Urban.
Mains (GS Paper III – Environment & Governance):
Key Point of News:
India’s Air Pollution Crisis: A Structural Issue:
- Air pollution is a year-round problem, not just a seasonal issue.
- Major Causes – Transportation, industrial emissions, construction, waste burning, and biomass use.
- Health Impacts – Increased respiratory diseases, school closures, economic losses.
Challenges in India’s Air Pollution Management:
- Fragmented Policies – Lack of coordination between central, state, and local bodies.
- Insufficient Budget – India’s NCAP budget is <1% of China’s investment in clean air.
- Data & Monitoring Issues – Over-reliance on air quality indices without tracking real emission sources.
- Institutional Misalignment – Only 60% of NCAP funds utilized (2019-2023).
Need for a Data-Driven & Action-Oriented Approach:
- Three-Phase Strategy:
- Identify local emission sources through high-resolution data.
- Allocate funds based on targeted interventions.
- Measure success through emission reduction, not just air quality index improvements.
- Guarding Against Superficial Solutions – Avoid over-reliance on AI dashboards, smog towers without fixing basic pollution sources (biomass burning, outdated industries).
Global Best Practices & India’s Path Forward:
- China: Shut down coal plants.
- Brazil: Community-led waste management.
- California: Used pollution revenue for poor communities.
- London: Banned coal before investing in air quality tech.
- India’s Approach Should Be:
- Federalism-friendly – Strengthen state and local governance.
- Subsidy-driven – Promote clean energy alternatives.
- Inclusive of Informal Economy – Address pollution from small-scale industries and rural biomass use.
Conclusion:
India’s clean air mission must focus on stronger governance, real-time emissions tracking, and targeted interventions. Mere promises and digital dashboards will not be enough—it requires political will, institutional alignment, and grassroots action to ensure clean air for all.
भारत को वायु साफ करने की आवश्यकता क्यों है?
समाचार में क्यों है?यह समाचार The Hindu समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ था, जिसमें वायु प्रदूषण से संबंधित मुद्दों और चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया है।
यह विषय UPSC प्रीलिम्स और मेंस के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
प्रीलिम्स (GS पेपर I और III)
- पर्यावरणीय मुद्दे के रूप में वायु प्रदूषण – PM2.5, PM10 और उनके स्वास्थ्य प्रभावों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य।
- सरकारी योजनाएँ एवं नीतियाँ – राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP), भारत VI, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY), FAME-II, स्वच्छ भारत मिशन-शहरी।
मेंस (GS पेपर III – पर्यावरण और प्रशासन)
समाचार के प्रमुख बिंदु:
भारत में वायु प्रदूषण संकट: एक संरचनात्मक समस्या
- वायु प्रदूषण केवल मौसमी समस्या नहीं, बल्कि पूरे वर्ष बनी रहने वाली समस्या है।
- मुख्य कारण – परिवहन, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्य, कचरा जलाना और बायोमास का उपयोग।
- स्वास्थ्य प्रभाव – श्वसन रोगों में वृद्धि, स्कूलों का बंद होना, आर्थिक क्षति।
भारत में वायु प्रदूषण प्रबंधन की चुनौतियाँ
- बिखरी हुई नीतियाँ – केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय की कमी।
- अपर्याप्त बजट – भारत का NCAP बजट, चीन के स्वच्छ वायु निवेश का 1% से भी कम।
- डेटा और निगरानी की समस्या – वास्तविक प्रदूषण स्रोतों की ट्रैकिंग के बजाय केवल वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) पर निर्भरता।
- संस्थागत असंतुलन – 2019-2023 के बीच जारी फंड का केवल 60% उपयोग किया गया।
डेटा-आधारित और कार्यवाही-उन्मुख दृष्टिकोण की आवश्यकता
तीन-चरणीय रणनीति:
- स्थानीय उत्सर्जन स्रोतों की पहचान उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा के माध्यम से।
- लक्षित हस्तक्षेपों के लिए धन आवंटित करें (उदाहरण: पुराने वाहनों को हटाना, स्वच्छ ऊर्जा अपनाना)।
- सिर्फ AQI नहीं, बल्कि उत्सर्जन में कमी को सफलता का मापदंड बनाएं।
- सतही समाधानों से बचाव – AI डैशबोर्ड, स्मॉग टावरों पर निर्भरता से बचना चाहिए, जब तक कि बायोमास जलाने और पुराने उद्योगों को नियंत्रित नहीं किया जाता।
वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएँ और भारत के लिए मार्गदर्शन
- चीन – कोयला संयंत्रों को बंद किया।
- ब्राजील – सामुदायिक नेतृत्व वाली अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली।
- कैलिफ़ोर्निया – प्रदूषण राजस्व को गरीब समुदायों में पुनर्निवेश किया।
- लंदन – कोयले पर प्रतिबंध लगाया और उसके बाद वायु गुणवत्ता तकनीकों में निवेश किया।
भारत को अपनाने योग्य रणनीतियाँ:
✔ संघीय सहयोग – राज्य और स्थानीय शासन को मजबूत करें।
✔ सब्सिडी-आधारित प्रोत्साहन – स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों को बढ़ावा दें।
✔ अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को शामिल करें – छोटे उद्योगों और ग्रामीण बायोमास उपयोग से होने वाले प्रदूषण का समाधान करें।
निष्कर्ष:
भारत का स्वच्छ वायु मिशन केवल वादों और डिजिटल डैशबोर्ड से सफल नहीं होगा। इसके लिए मजबूत शासन, वास्तविक समय उत्सर्जन ट्रैकिंग, और जमीनी स्तर पर लक्षित हस्तक्षेपों की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि स्वच्छ हवा सभी के लिए एक अधिकार बने, राजनीतिक इच्छाशक्ति, संस्थागत समन्वय और ठोस कार्रवाई आवश्यक है।