Protection of Interests in Aircraft Objects Bill, 2025/विमान वस्तुओं में हितों की सुरक्षा विधेयक, 2025:

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April 2, 2025

Protection of Interests in Aircraft Objects Bill, 2025/विमान वस्तुओं में हितों की सुरक्षा विधेयक, 2025:

Why in News ?  Rajya Sabha has passed the Protection of Interests in Aircraft Objects Bill, 2025, which seeks to provide legal clarity on disputes between airlines and lessors regarding aircraft and engines. The Bill implements provisions of the Cape Town Convention, addressing challenges airlines like SpiceJet and Go First have faced in repossessing leased aircraft due to the absence of uniform legislation.

Why Important for UPSC (Prelims & Mains)?

Prelims (GS Paper II & III)

  • International Treaties & Conventions – Cape Town Convention and its implications.
  • Government Policies & Economic Impact – Role of DGCA in aviation regulations.

Mains (GS Paper II – Governance & International Relations, GS Paper III – Economy)

  • Legal & Regulatory Challenges in India’s aviation sector.
  • Economic Impact – How lower leasing costs could reduce airfares.
  • India’s Aviation Industry & Foreign Investment – The role of uniform laws in attracting foreign lessors.

Key Points of the News:

Objective of the Bill:

    • Provides clarity in disputes between airlines and lessors of aircraft and engines.
    • Implements provisions of the Cape Town Convention for uniform interpretation in Indian courts.

Need for the Bill:

    • Past disputes (SpiceJet, Go First) showed legal ambiguities regarding lessors’ rights.
    • Ensures easy repossession of aircraft by lessors in case of defaults.

Impact on the Aviation Sector:

    • Expected to reduce leasing costs by 8-10%, lowering operational costs for airlines.
    • Could lead to cheaper airfares for passengers.
    • Strengthens India’s position in the global leasing market.

Role of DGCA:

    • Recognized as the authority responsible for enforcing the provisions of the Bill.

Significance of the Cape Town Convention:

    • An international treaty that standardizes rules for aircraft leasing and financing.
    • Protects creditors’ rights in case of payment defaults.

Current Leasing Scenario in India:

    • 86% of India’s 850 aircraft fleet is leased from third-party lessors.
    • Leasing helps airlines maintain liquidity instead of outright purchases.

About Cape Town Convention:

  • The Cape Town Convention on International Interests in Mobile Equipment (2001) is an international treaty designed to standardize and regulate the financing, leasing, and repossession of high-value mobile assets, including aircraft, railway rolling stock, and space assets.

 Key Objectives of the Convention:

  • Establishes a uniform legal framework for securing the rights of creditors (lessors, banks, financiers).
  • Ensures easy repossession of aircraft and engines in case of default.
  • Reduces financing risks, making leasing and borrowing cheaper for airlines.
  • Helps attract foreign investment in aviation by providing legal clarity.

India and the Cape Town Convention:

  • India is a signatory to the Cape Town Convention and Protocol (2001) but has not fully incorporated it into domestic law.
  • The Protection of Interests in Aircraft Objects Bill, 2025seeks to align India’s legal framework with the Convention, ensuring easier repossession for lessors.
  • It is expected to lower leasing costs and boost investor confidence in India’s aviation sector.

About DGCA (Directorate General of Civil Aviation):

  • The DGCA (Directorate General of Civil Aviation) is the regulatory body overseeing civil aviation in India under the Ministry of Civil Aviation.

Composition of DGCA:

Headed by: Director General of Civil Aviation (Appointed by the government).

Other key members: Includes Deputy Directors General, Regional Directors, and Technical Officers handling specific aviation safety and regulatory functions.

Organizational Structure:

Central DGCA Office (New Delhi) – Policy-making and national oversight.

Regional Offices – Enforcement and operational monitoring.

Field Offices & Airworthiness Units – Airport inspections, flight safety, and certification.

Powers and Responsibilities of DGCA:

  • Aircraft Regulation & Safety
  • Certification of aircraft and pilots
  • Issuing Airworthiness Certificates & Flight Approvals
  • Airline Licensing & Monitoring
  • Granting Air Operator Permits (AOP) and airline licenses.
  • Ensuring compliance with safety and operational standards
  • Investigation of Air Accidents & Incidents
  • Conducting inquiries into aviation accidents

Conclusion:

The Bill is expected to bring legal certainty, boost investor confidence, and lower leasing costs, ultimately benefiting the Indian aviation sector. Its implementation aligns India’s legal framework with global best practices, ensuring easier aircraft financing and better airline operations.

विमान वस्तुओं में हितों की सुरक्षा विधेयक, 2025:

 समाचार में क्यों है? राज्यसभा ने विमान वस्तुओं में हितों की सुरक्षा विधेयक, 2025 पारित किया, जो एयरलाइंस और पट्टेदारों (Lessors) के बीच विमानों और इंजनों से संबंधित विवादों को स्पष्ट करने के लिए लाया गया है। यह केप टाउन कन्वेंशन के प्रावधानों को लागू करता है, जिससे स्पाइसजेट और गो फर्स्ट जैसी एयरलाइंस द्वारा विमानों को फिर से प्राप्त करने में आने वाली कानूनी अस्पष्टताओं को दूर किया जाएगा।

UPSC (प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा) के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

प्रारंभिक परीक्षा (GS पेपर II & III)

अंतरराष्ट्रीय संधियाँ और सम्मेलन – केप टाउन कन्वेंशन और इसके प्रभाव।
सरकारी नीतियाँ और आर्थिक प्रभाव – विमानन क्षेत्र में DGCA की भूमिका।

मुख्य परीक्षा (GS पेपर II – शासन और अंतरराष्ट्रीय संबंध, GS पेपर III – अर्थव्यवस्था)

भारत के विमानन क्षेत्र में कानूनी और नियामक चुनौतियाँ।
आर्थिक प्रभाव – पट्टे की लागत घटने से हवाई किराये कम होने की संभावना।
भारत के विमानन उद्योग और विदेशी निवेश – विदेशी पट्टेदारों (lessors) को आकर्षित करने में एकरूप कानूनों की भूमिका।

समाचार के प्रमुख बिंदु

विधेयक का उद्देश्य:
✔ एयरलाइंस और पट्टेदारों के बीच विवादों को स्पष्ट करना।
✔ भारतीय न्यायालयों में केप टाउन कन्वेंशन के प्रावधानों की समान व्याख्या सुनिश्चित करना।

विधेयक की आवश्यकता:
स्पाइसजेट और गो फर्स्ट जैसी एयरलाइंस से जुड़े पिछले विवादों में कानूनी अस्पष्टता देखी गई।
✔ पट्टेदारों को डिफॉल्ट की स्थिति में विमान की पुनः प्राप्ति में आसानी प्रदान करना।

विमानन क्षेत्र पर प्रभाव:
✔ पट्टे की लागत 8-10% तक कम होने की संभावना, जिससे एयरलाइंस का परिचालन खर्च घटेगा।
✔ हवाई किराया सस्ता होने की संभावना।
✔ वैश्विक विमान पट्टा बाजार में भारत की स्थिति मजबूत होगी।

DGCA की भूमिका:
✔ इस विधेयक के प्रावधानों को लागू करने के लिए नोडल एजेंसी के रूप में मान्यता।

केप टाउन कन्वेंशन का महत्व:
✔ यह अंतरराष्ट्रीय संधि विमानों के पट्टे और वित्तपोषण के नियमों को मानकीकृत करती है।
ऋणदाताओं (creditors) के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

भारत में मौजूदा विमान पट्टा परिदृश्य:
86% भारतीय विमानन बेड़ा पट्टे पर आधारित है।
✔ एयरलाइंस तरलता (liquidity) बनाए रखने के लिए विमान खरीदने के बजाय पट्टे पर लेना पसंद करती हैं।

केप टाउन कन्वेंशन के बारे में:

  • केप टाउन कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल इंटरेस्ट्स इन मोबाइल इक्विपमेंट (2001) एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य वित्तपोषण, लीजिंग और उच्च-मूल्य वाली मोबाइल संपत्तियों (जैसे विमान, रेलवे रोलिंग स्टॉक और अंतरिक्ष उपकरण) की पुनः प्राप्ति को मानकीकृत और विनियमित करना है।

कन्वेंशन के प्रमुख उद्देश्य:

  • ऋणदाताओं (लीजदाताओं, बैंकों, वित्तीय संस्थानों) के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना।
  • विमान और इंजनों की आसान पुनः प्राप्ति सुनिश्चित करना, यदि भुगतान में चूक हो।
  • वित्तीय जोखिम कम करना, जिससे एयरलाइंस के लिए लीजिंग और उधारी सस्ती हो।
  • भारतीय विमानन क्षेत्र में विदेशी निवेश आकर्षित करना और कानूनी स्पष्टता प्रदान करना।

भारत और केप टाउन कन्वेंशन:

  • भारत 2001 के केप टाउन कन्वेंशन और प्रोटोकॉल का हस्ताक्षरकर्ता है, लेकिन इसे अभी तक पूरी तरह से घरेलू कानून में शामिल नहीं किया गया है।
  • “एयरक्राफ्ट ऑब्जेक्ट्स में हितों की सुरक्षा विधेयक, 2025” भारत के कानूनी ढांचे को कन्वेंशन के अनुरूप बनाने का प्रयास करता है, जिससे लीजदाताओं के लिए पुनः प्राप्ति की प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
  • यह लीजिंग लागत को कम करेगा और भारतीय विमानन क्षेत्र में निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगा।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के बारे में:

  • नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) भारत में नागरिक उड्डयन क्षेत्र की निगरानी करने वाला एक नियामक निकाय है, जो नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।

DGCA की संरचना:

  • प्रमुख: नागरिक उड्डयन महानिदेशक (Director General of Civil Aviation) (सरकार द्वारा नियुक्त)।
  • अन्य महत्वपूर्ण सदस्य: उप-महानिदेशक (Deputy Directors General), क्षेत्रीय निदेशक (Regional Directors), और तकनीकी अधिकारी (Technical Officers) जो उड्डयन सुरक्षा और नियामक कार्यों को संभालते हैं।

DGCA का संगठनात्मक ढांचा:

केंद्रीय DGCA कार्यालय (नई दिल्ली) – नीति निर्माण और राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी।

क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Offices) – नियमों के क्रियान्वयन और परिचालन की निगरानी।

फील्ड ऑफिस और एयरवर्थीनेस यूनिट्स (Field Offices & Airworthiness Units) – हवाई अड्डों का निरीक्षण, उड़ान सुरक्षा और प्रमाणन।

DGCA की शक्तियां और जिम्मेदारियां:

  • विमान नियमन और सुरक्षा (Aircraft Regulation & Safety)
  • विमानों और पायलटों को प्रमाणित करना।
  • एयरवर्थीनेस सर्टिफिकेट और फ्लाइट अनुमतियाँ जारी करना।

एयरलाइन लाइसेंसिंग और निगरानी (Airline Licensing & Monitoring)

  • एयर ऑपरेटर परमिट (AOP) और एयरलाइन लाइसेंस प्रदान करना।
  • सुरक्षा और संचालन मानकों का पालन सुनिश्चित करना।

हवाई दुर्घटनाओं की जांच (Investigation of Air Accidents & Incidents)

  • हवाई दुर्घटनाओं की जांच करना और सुरक्षा उपायों की सिफारिश करना।
  • रिपोर्ट जारी कर सुरक्षा दिशानिर्देश तय करना।

अंतरराष्ट्रीय मानकों का प्रवर्तन (Enforcement of International Standards)

  • अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के नियमों को लागू करना।
  • भारत की नीतियों को वैश्विक विमानन मानकों के अनुरूप बनाना।

केप टाउन कन्वेंशन के कार्यान्वयन में भूमिका (Role in Implementing the Cape Town Convention)

  • “एयरक्राफ्ट ऑब्जेक्ट्स में हितों की सुरक्षा विधेयक, 2025” के तहत, DGCA को इस कन्वेंशन के प्रावधानों को लागू करने के लिए अधिकृत निकाय के रूप में मान्यता दी गई है।
  • यह सुनिश्चित करेगा कि भारतीय अदालतों में लीजिंग और वित्तपोषण से जुड़े विवादों का शीघ्र निपटारा हो।

DGCA के वर्तमान प्रमुख (2025 तक):

  • DGCA के महानिदेशक की नियुक्ति भारत सरकार द्वारा की जाती है। (ताज़ा जानकारी के लिए वेब सर्च की आवश्यकता होगी)।

निष्कर्ष:

केप टाउन कन्वेंशन और DGCA की नीतियां भारतीय विमानन उद्योग को मजबूत बनाने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और विमानन क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


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