Fully Accessible Route (FAR) bonds/फुली एक्सेसेबल रूट (FAR) बॉन्ड्स:

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April 1, 2025

Fully Accessible Route (FAR) bonds/फुली एक्सेसेबल रूट (FAR) बॉन्ड्स:

Why in News ?  Foreign Portfolio Investors (FPIs) have been heavily selling Indian stocks, yet they have invested $6 billion (Rs 51,370 crore) into Fully Accessible Route (FAR) bonds since January 2024. In March alone, they invested Rs 29,044 crore in Indian bonds. This shift is linked to India’s inclusion in the JP Morgan Emerging Market Bond Index starting June 2024, attracting global investors.

Why is it Important for UPSC (Prelims & Mains)?

Key Terms for Prelims:

  • Fully Accessible Route (FAR) Bonds
  • Foreign Portfolio Investors (FPIs)
  • JP Morgan Emerging Market Bond Index
  • Government Securities (G-Secs)
  • Monetary Policy and Investment Caps
  • India’s Fiscal Deficit & Bond Yields
  • Mains: It is relevant under GS-3 (Indian Economy)—topics like capital markets, foreign investment trends, monetary policy, and India’s bond market reforms.

Key Points of the News:

  1. Foreign investment shift: FPIs are withdrawing from equities but increasing investments in Indian bonds, particularly in FAR bonds.
  2. Global Index Inclusion: India’s bond market will be included in JP Morgan Emerging Market Bond Index from June 2024, attracting long-term foreign capital.
  3. Government Policy: The Reserve Bank of India (RBI) introduced FAR bonds in 2020 to remove restrictions on foreign investment in selected government securities.
  4. Economic Impact: Increased foreign bond inflows strengthen the rupee, lower borrowing costs, and improve India’s financial stability.
  5. Future Trends: Bond inflows are expected to increase to $25–30 billion by March 2025, especially with potential inclusion in Bloomberg and FTSE bond indices.

What are FAR Bonds?

Fully Accessible Route (FAR) Bonds are government securities (G-Secs) issued by the Reserve Bank of India (RBI) that allow unrestricted foreign investment. Unlike other government bonds that have limits on Foreign Portfolio Investors (FPIs), FAR bonds can be freely bought and sold by both residents and non-residents without any investment caps.

Why were FAR Bonds Introduced?

  • Launched in March 2020 to increase foreign participation in India’s bond market.
  • Helped attract foreign capital by making Indian bonds more accessible to global investors.
  • Supported India’s inclusion in global bond indices like the JP Morgan Emerging Market Bond Index (effective June 2024).
  • Aimed at reducing government borrowing costs by increasing demand for Indian bonds.

Examples of FAR Bonds:

  1. 5.22% GS 2025 – A government security maturing in 2025.
  2. 6.10% GS 2031 – A long-term bond with a fixed interest rate of 6.10%.
  3. 7.18% GS 2033 – A newly issued bond for long-term investors.

These bonds are highly liquid, making them attractive to international investors, and are expected to bring $25–30 billion in foreign inflows by March 2025.

Impact of FAR Bonds:

  • Increases India’s foreign exchange reserves through FPI investments.
  • Stabilizes the Indian rupee by ensuring steady dollar inflows.
  • Lowers borrowing costs for the government as demand for bonds increases.
  • Boosts India’s bond market depth, making it more attractive for future international investment.

फुली एक्सेसेबल रूट (FAR) बॉन्ड्स:

खबर में क्यों? विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली के बावजूद, उन्होंने जनवरी 2024 से फुली एक्सेसेबल रूट (FAR) बॉन्ड्स में 6 बिलियन डॉलर (₹51,370 करोड़) का निवेश किया है। मार्च 2024 में अकेले ₹29,044 करोड़ का निवेश किया गया। यह बदलाव भारत के JP Morgan उभरते बाजार बॉन्ड इंडेक्स (Emerging Market Bond Index) में जून 2024 से शामिल होने से जुड़ा है, जिससे वैश्विक निवेशक आकर्षित हो रहे हैं।

UPSC (प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा) के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) के लिए प्रमुख शब्द:

  • फुली एक्सेसेबल रूट (FAR) बॉन्ड्स
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs)
  • JP Morgan उभरते बाजार बॉन्ड इंडेक्स
  • सरकारी प्रतिभूतियाँ (G-Secs)
  • मौद्रिक नीति और निवेश सीमाएँ
  • भारत का वित्तीय घाटा और बॉन्ड प्रतिफल (Bond Yields)

मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए:

  • GS-3 (भारतीय अर्थव्यवस्था): पूंजी बाजार, विदेशी निवेश के रुझान, मौद्रिक नीति, और भारत के बॉन्ड बाजार सुधार से संबंधित टॉपिक्स।

समाचार के मुख्य बिंदु:

  1. निवेश में बदलाव: FPIs शेयर बाजार से पैसे निकाल रहे हैं, लेकिन भारतीय बॉन्ड बाजार, विशेष रूप से FAR बॉन्ड्स में निवेश बढ़ा रहे हैं।
  2. वैश्विक इंडेक्स में शामिल होना: भारत का बॉन्ड बाजार जून 2024 से JP Morgan उभरते बाजार बॉन्ड इंडेक्स में शामिल होगा, जिससे दीर्घकालिक विदेशी पूंजी आकर्षित होगी।
  3. सरकारी नीति: RBI ने 2020 में FAR बॉन्ड्स पेश किए ताकि कुछ सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश पर लगी सीमा हटाई जा सके।
  4. आर्थिक प्रभाव: विदेशी निवेश से रुपया मजबूत होगा, सरकारी उधारी की लागत घटेगी, और भारत की वित्तीय स्थिरता बेहतर होगी।
  5. भविष्य की संभावनाएँ: मार्च 2025 तक $25–30 बिलियन की बॉन्ड निवेश आमदनी की उम्मीद है, और भारत को Bloomberg और FTSE बॉन्ड इंडेक्स में शामिल होने का भी लाभ मिल सकता है।

FAR बॉन्ड्स क्या हैं?

  • फुली एक्सेसेबल रूट (FAR) बॉन्ड्स वे सरकारी प्रतिभूतियाँ (G-Secs) हैं, जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किया जाता है और इनमें विदेशी निवेशकों को बिना किसी निवेश सीमा के निवेश की अनुमति होती है। अन्य सरकारी बॉन्ड्स के विपरीत, FAR बॉन्ड्स को भारतीय और विदेशी निवेशक बिना किसी प्रतिबंध के खरीद और बेच सकते हैं।

FAR बॉन्ड्स क्यों पेश किए गए?

  • मार्च 2020 में शुरू किए गए ताकि भारत के बॉन्ड बाजार में विदेशी भागीदारी बढ़ सके।
  • विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए भारतीय बॉन्ड्स को वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक सुलभ बनाया गया।
  • भारत के वैश्विक बॉन्ड इंडेक्स में शामिल होने का समर्थन किया, जैसे JP Morgan उभरते बाजार बॉन्ड इंडेक्स (जून 2024 से लागू)।
  • सरकार की उधारी लागत घटाने के उद्देश्य से अधिक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए।

FAR बॉन्ड्स के उदाहरण:

  1. 5.22% GS 2025 – 2025 में परिपक्व होने वाली सरकारी प्रतिभूति।
  2. 6.10% GS 2031 – 6.10% निश्चित ब्याज दर के साथ दीर्घकालिक बॉन्ड।
  3. 7.18% GS 2033 – लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एक नया जारी किया गया बॉन्ड।

FAR बॉन्ड्स का प्रभाव:

  • भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि विदेशी निवेश के कारण।
  • रुपये की स्थिरता में सुधार क्योंकि डॉलर का प्रवाह निरंतर बना रहेगा।
  • सरकारी उधारी की लागत में कमी, क्योंकि बॉन्ड की मांग बढ़ेगी।
  • भारत के बॉन्ड बाजार की गहराई में वृद्धि, जिससे भविष्य में और अधिक विदेशी निवेश आकर्षित होगा।

यह विषय UPSC के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर अर्थव्यवस्था, वित्तीय स्थिरता, विदेशी निवेश, और मौद्रिक नीति से जुड़े प्रश्नों के लिए। क्या आपको इससे संबंधित उत्तर लेखन या MCQs चाहिए?


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